राजस्थान में बेहतर वित्तीय आत्म निर्भरता ।

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प्रद्युम्न शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार

राजस्थान में सरकार बदलने के बाद से पिछली योजनाओं का लेखा-जोखा शुरू हो गया है और पिछली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का नए सिरे से संचालन करने पर विचार बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आश्वासन के अनुरूप मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी भरोसा दिला चुके हैं कि आम जनता के हितार्थ संचालित योजनाएं बंद नहीं होगी। बहरहाल कुछ योजनाओं के लेवल बदले गए हैं। जैसे इंदिरा रसोई योजना के नाम से इंदिरा शब्द हटा दिया गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछली सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर 46000 करोड रुपए से ज्यादा राशि खर्च की है।

आमतौर पर जब चुनाव संपन्न होने के बाद नई सरकार बनती है तो हमेशा एक ही जुमला कहा जाता है की खजाना खाली है ।लेकिन इस बार यह दावा ना तो सरकारी सूत्रों ने किया और ना ही कोई राजनेता इस तरह के बयान दे पाए ।इसका कारण भी है ।पिछली अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में सुदृढ़ आर्थिक प्रबंध किए गए जिसकी वजह से न केवल सरकार को कल्याणकारी योजनाएं लागू करने का अवसर मिला बल्कि उसके लिए आवश्यक धन प्रबंधन भी किए जा सके। इस बात से यह सीख भी मिलती है कि यदि सरकारें व्यापार के बजाय कल्याण पर ध्यान दें तो धनाभाव कोई बाधा नहीं बन सकता।

राजस्थान के वित्तीय हालातों की अन्य राज्यों और राजस्थान के ही पूर्व हालातों से तुलनात्मक विश्लेषण करने पर प्रतीत होता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ स्थिति में है ।वित्तीय हालत काफी सुधरे हैं ।राजस्थान का वित्तीय घाटा अन्य राज्यों की तुलना में कम हुआ है ।राजस्व अर्जन के मामले में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद जीएसडीपी की तुलना में पिछले एक दशक में सभी राज्यों के मुकाबले अधिक है ।ध्यान देने योग्य बात है कि राजस्थान में बेहतर वित्तीय आत्म निर्भरता आई है। केंद्र की सहायता के बगैर अर्जित धन । कर राजस्व और गैर कर राजस्व से अर्जित धन, दोनों अन्य राज्यों के औसत से अधिक है और दोनों में पिछले कुछ समय के दौरान वृद्धि हुई है।

दूसरी तरफ व्यय पर दृष्टिपात करें तो राजस्थान अपने संपूर्ण खर्च का बड़ा भाग चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय करता रहा है ।यह अन्य सभी राज्यों के औसत से अधिक है। सब्सिडी के मोर्चे पर भी राजस्थान का खर्च औसत से अधिक रहा है ।राज्य का सब्सिडी प्रतिशत जीएसडीपी की तुलना में कोविड से पहले गिर रहा था। ऐसे समय में जब सभी राज्यों में यह बढ़ रहा था। हालांकि महामारी के बाद राजस्थान का सब्सिडी खर्च बढ़ा ,जबकि अन्य राज्यों में सब्सिडी पर औसत खर्च में गिरावट आई।

वित्त व्यवस्था से जुड़े राज्य के कुछ अधिकारियों का कहना रहा है कि यह सब मांग पक्ष को बढ़ावा देने की पिछली सरकार की ठोस रणनीति का भाग था। जिसमें जनता को अधिक साधन उपलब्ध करवाने से मांग में वृद्धि को प्रेरित किया जाता है। वस्तु और सेवाओं की बिक्री से राजस्व संग्रह बढ़ाकर राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि राजस्व खर्च के भाग के रूप में निशुल्क सुविधाओं पर अधिक धन आवंटन से संबद्ध राज्य की प्राथमिक पूंजीगत व्यय में गिरावट आती है जो एक दूसरे से बेहतर स्थिति नहीं है।

पूंजीगत व्यय से रोजगार के अवसर और नई परिसंपत्तियां सृजित होती हैं तो सस्ती ईंधन गैस मुफ्त साइकिल अथवा सिलाई मशीन से भी इस तरह प्राकृतिक गैस, साइकिल अथवा सिलाई मशीन उद्योग को बढ़ावा मिलता है। राज्य अपने बजट के आकार के अनुरूप पूंजीगत व्यय करते हैं ।लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि राजस्व व्यय का यह भाग अनुत्पादक है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में पूंजीगत व्यय ज्यादा प्रभावी है । इससे वास्तविक संपदा निर्मित होती है ।सड़क ,पुल, अस्पताल और स्कूल निर्माण के रूप में पूंजीगत व्यय में रोजगार सृजन, मांग और अन्य संबद्ध उद्योगों के लिए रोजगार और मांग में वृद्धि के लिए ज्यादा सहायक है। इससे कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि होती है।

महामारी के समय वर्ष 2020-21 के दौरान, जहां एक वित्त वर्ष में राजस्व से ज्यादा व्यय था, राजस्थान का वित्तीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद जीएसडीपी वर्ष 2019-20 के 3.8 से बढ़कर 5.9 हो गया ।यह एक वर्ष में 2.1 प्रतिशत अधिक वृद्धि थी । हालांकि सभी राज्यों में यह वृद्धि हुई परंतु इतनी मात्रा में नहीं ।

औसतन सभी राज्यों में वित्तीय घाटा 2019-20 के 2.6% की तुलना में 2020-21 में 4.1% हो गया। तब से राजस्थान में अपना वित्तीय घाटा वापस नियंत्रित करने में अच्छा कार्य किया ।वर्ष 2022-23 में राज्य ने वित्तीय घाटा चार प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। जबकि अन्य राज्यों का औसत 3.4 था ।इसका अर्थ राजस्थान दो वर्ष में 1.9% पॉइंट वित्तीय घाटा कम किया। जबकि अन्यों ने औसतन 0.6% कमी की।

@ साभार समाचार पत्र माइंड प्लस के 15 जनवरी 2024 के अंक से