संघर्षपूर्ण जीवन के दम पर CM की कुर्सी मिली

हैदराबाद, 8 दिसंबर।  कांग्रेस ने संघर्ष के रूप  में  पहचान  स्थापित करने वाले 55 वर्षीय रेवंत रेड्डी को तेलंगाना का मुख्यमंत्री बनाना तय किया।कांग्रेस के इस निर्णय का प्रदेशवासियोंने खुले मन से स्वीकार किया है।

रेवंत रेड्डी कैसे जमाने में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी के सक्रिय नेता थे लेकिन तेलंगाना अलग होने के बाद उन्होंने केसीआर की सरकार के खिलाफ जबर्दस्त संघर्ष किया और इस संघर्ष के दौरान उन पर 200 मुकदमे दर्ज हुए।

रेवंत सरकार से सवाल करने की आवाज बन गए। रेवंत बेरोजगारों की ओर से, परियोजनाओं पर अपनी जमीन खोने वाले विस्थापित लोगों की ओर से, किसानों की समस्याओं पर प्रभावी ढंग से आवाज उठाते रहे। वह केसीआर सरकार पर हमलावर रहे। राज्य में चाहे कुछ भी हुआ हो। उन्होंने लोगों की तरफ से वकालत की। वे तेलंगाना के लोगों के लिए एक भरोसा बनकर खड़े होने में सफल रहे।

रेवंत रेड्डी का घर सुनवाई के लिए हरदम खुला रहता था। साथ ही वे विभिन्न शहरों और गांवों का दौरा करके लोगों की समस्याएं सुनते थे तथा उन्हें लिखित में विश्वास दिलाते थे कि जब सत्ता में आएंगे तो उनकी समस्या का समाधान करेंगे। उन्होंने एक बौनी युवती की परिवेदना सुनकर उसे लिखित में विश्वास दिलाया कि जिस दिन वे मुख्यमंत्री बनेंगे, पहला आदेश उसकी नौकरी का देंगे और आज जब उन्होंने शपथ ली तो न केवल उसे शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया वरन उसे नियुक्ति पत्र भी दिया।

रेवंत रेड्डी ने   चुनाव से पहले  वायदा किया था कि वह मुख्यमंत्री बने तो अपने निवास के बाहर लगे बैरिकेट्स उखड़वा देंगे ताकि आम जनता उन तक पहुंच सके और शपथ ग्रहण से पहले उन्होंने अपना यह वायदा पूरा भी किया।

रेवंत राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ-साथ तेलंगाना की जनता का विश्वास अर्जित करने में सफल रहे। उन्होंने तेलंगाना के संस्थापक और बीआरएस पार्टी के अध्यक्ष चंद्र शेखर राव को जड़ से उखाड़ फेंका।

रेवंत रेड्डी   की कार्य प्रणाली को देखकर लगता है कि वह आसानी से अगले दस साल तेलंगाना के सिंहासन पर टिकेंगे। किसी अन्य दल के लिए उनसे कुर्सी छीनना आसान नहीं होगा।