दक्षिण मुखी प्लाट या घर है तो रखे ध्यान वर्ना …..?

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दक्षिण मुखी प्लाट में मुख्य द्वार आग्नेय कोण में बनाना वास्तु की दृष्टि में उचित माना गया है। उत्तर तथा पूर्व की तरफ ज्यादा व पश्चिम व दक्षिण में कम से कम खुला स्थान छोड़ा गया है तो भी दक्षिण का दोष कम हो जाता है। ऐसे प्लाट में छोटे पौधे पूर्व-ईशान में लगाने से भी दोष कम होता है।

वास्तु विशेषज्ञों का कहना हैं कि दक्षिणमुखी भवन में ऊर्जा के सकारात्मक प्रवाह को सुनिश्चित करने में मुख्य दरवाजा मुख्य भूमिका निभाता है। घर के निर्माण के दौरान, भूमि या भवन की लंबाई और चौड़ाई को नौ समान भागों में विभाजित किया जाना है।आपकी दक्षिणमुखी भवन में मुख्य दरवाजा को चौथे पाड़ा पर सही स्थान पर रखा जाना चाहिए, ताकि पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा शामिल हो ।

मुख्य दरवाजे को सेंटर से दक्षिण-पूर्व की तरफ थोड़ा सा बनाया जाना है। अगर गेट बहुत छोटा लगता है, तो आप इसे बड़ा करने के लिए पाड़ा 3, 2 या 1 की ओर बढ़ सकते हैं। दक्षिण मुखी घर के वास्तु प्लान के मुताबिक यह एंट्रेंस गेट पूरे घर में सबसे बड़ा होना चाहिए और यह घड़ी की दिशा में अंदर की ओर खुले और दहलीज हो । दक्षिणी तरफ की दीवारों को उत्तरी पक्ष की तुलना में अधिक ऊंचा रखनी चाहिए ।

लिविंग रूम बनाने के लिए घर का नॉर्थ-ईस्ट हिस्सा सबसे अच्छा स्थान होता है।जगह की कमी हो तो आप छोटे से मंदिर के लिए अपने रहने वाले कमरे का एक हिस्सा समर्पित कर सकते हैं।

रसोई बनाने के लिए घर में आदर्श स्थान दक्षिण-पूर्व दिशा है। खाना पकाने के दौरान, आपका पूर्व की ओर मुंह होना चाहिए। इससे वहां पूरे दिन सूर्य की रोशनी रहेगी। यह संभव नहीं हो तो रसोई उत्तर-पश्चिम दिशा है। अगर आपकी रसोई इस तरह से स्थित है, तो ऐसी व्यवस्था करें कि खाना बनाते समय आपका मुंह पश्चिम की ओर हो।

साउथ फेसिंग घरों में मास्टर बेडरूम की आदर्श जगह साउथ-वेस्ट दिशा होती है। मास्टर बेडरूम टॉप फ्लोर पर होना चाहिए।बच्चों के बेडरूम या नर्सरी का निर्माण उत्तर-पश्चिम हिस्से में किया जाना चाहिए। अगर यह संभव नहीं है, तो आप इस कमरे को बनाने के लिए दक्षिणी या पश्चिमी हिस्सों के बीच भी चुन सकते हैं।बच्चों के कमरों की तरह, गेस्ट रूम भी घर के नॉर्थ-वेस्ट हिस्से में बनाया जाना चाहिए।घरों में सीढ़ियां दक्षिणी कोने में होनी चाहिए।घर का रंग भूरा, लाल और नारंगी दक्षिण मुखी घरों के लिए निर्धारित रंग हैं।

दक्षिणमुखी घरों में वास्तु दोषों से बचने के लिए इन चीजों से बचें

-दक्षिण-पश्चिम दिशा में पानी का स्थान नहीं रखे ।-दक्षिण में पार्किंग स्पेस-साउथ वेस्ट में किचन, उत्तर की तुलना में दक्षिण में ज्यादा खुला स्पेस

“कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा में कार पार्क, गार्डन, वॉटर पंप या सेप्टिक टैंक का निर्माण न करें.”अपने घर के पूर्व और उत्तर की ओर खुले क्षेत्र को रखें, क्योंकि सूर्य की किरणें इस ओर से प्रवेश करती हैं. पश्चिम या दक्षिण में इस तरह के अधिक स्थान होना आदर्श नहीं है।दक्षिणमुखी घरों के फायदे और नुकसान फायदे-सूरज की ज्यादा रोशनी-ज्यादा गर्मी-बिजली का कम बिल-ज्यादा महंगा होता है ।”

वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तु दोष को दूर करना संभव नहीं है तो उसका असर कम करने के उपाय कर विकास ,उन्नति के पथ पर बढ सकते है ।