खालिस्तान समर्थकों की हताशा से उपजी अभद्रता

Indecency arising from frustration of Khalistan supporters

अमेरिका के न्यूयार्क में लांग आइलैंड क्षेत्र में गुरुपर्व के मौके पर गुरुद्वारे में माथा टेकने गए भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू से खालिस्तान समर्थकों की धक्का-मुक्की और शर्मनाक व्यवहार न केवल निन्दनीय है बल्कि सिख धर्म की पवित्र, मर्यादामय एवं शांतिप्रिय परम्परा को धुंधलाने का कुत्सित प्रयास है। सिखधर्म के संस्थापक, मानवीय मूल्यों के प्रेरक एवं राष्ट्रीयता के सुदृढ़ आधार महान धर्मगुरु के जन्मोत्सव-गुरुपर्व जैसे पवित्र एवं पावन अवसर पर ऐसी हरकत करने वाले सच्चे सिख कैसे हो सकते हैं?

ऐसे खालिस्तान समर्थकों ने आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए राजदूत संधू को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके विरुद्ध नारेबाजी-धक्कामुक्की करना एवं अपने गुरुद्वारे की चौखट पर माथा टेकने आये इस विशिष्ट अतिथि एवं साधर्मिक पर हत्या की साजिश का आरोप लगाना हर दृष्टिकोण से तीव्र भर्त्सनापूर्ण है। कनाड़ा एवं अमेरिका में बढ़ रही हिन्दू विरोधी घटनाएं के पीछे छिपी दोनों देशों की मंशा एवं नियत की अनदेखी करना भारी भूल होगा क्योंकि इससे भारतीय संदर्भों में नई जटिलताएं खड़ी हो सकती है और इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा।

जिस तरह दुनिया में मुस्लिम आतंकवाद चिन्ता का विषय है, ठीक उसी तरह खालिस्तानी आतंकवाद भी भारत सहित दुनिया के लिये एक बड़ा संकट बन रहा है। अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिये कनाड़ा, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया में कुछ खालिस्तान समर्थकों को संरक्षण मिलना, एक चिनगारी को आग बनाने एवं दुनिया में अशांति, हिंसा एवं आतंक के लिये उर्वरा भूमि तैयार करना है।

कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लोकप्रियता महंगाई और बेरोजगारी तथा लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के चलते घट चुकी है और वह जैसे-तैसे अपना पद बचाने के लिए जुगाड़ में लगे हैं और इसके लिये खालिस्तान समर्थकों की अलगाववादी गतिविधियों को बल दे रहे हैं या इन गतिविधियों से इतने अनजान हो जाते हैं कि वे चाहे-अनचाहे उनकी राह आसान कर देते हैं।

कनाडा में खालिस्तानी तत्व लगातार हिन्दू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और गुरपतवंत सिंह पन्नू ने तो यह धमकी भी दी है कि कनाडा से हिन्दुओं को निकाला जाना चाहिए। पन्नू ने हाल ही में एयर इंडिया के विमानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी और वह लगातार भारत के विरुद्ध जहर उगल रहा है। प्रधानमंत्री ट्रूडो का इन साजिशों एवं धमकियों को नजरअंदाज करने का कारण उनका खालिस्तान समर्थकों से समझौता होना बताया जाता है। इसी के चलते जस्टिन ट्रूडो एक के बाद एक गलतियां कर रहे हैं, जिसके चलते कनाडा में किसी दूसरे देश की तुलना में ज्यादा ड्रग तस्कर, आतंकी और गैंगस्टर मौजूद हैं। यह वही खालिस्तानी हैं जिन्होंने भारत के कनिष्क विमान को उड़ा दिया था, जिसमें 300 से ज्यादा कनाडाई नागरिक मारे गए थे। वहां खालिस्तान समर्थक अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। क्या कनाड़ा अपनी धरती पर आतंकवाद को पोषण देकर बिन बुलाये एक गंभीर समस्या को नहीं न्यौत रहा है?

कनाड़ा की ही भांति अमेरिका भी खालिस्तानी आतंक को पनपा रहा है। यही कारण है कि अमेरिका ने तो भारत को यहां तक कह दिया था कि वह आतंकवादी निज्जर की हत्या की जांच में कनाडा को सहयोग करेगा। हैरानी इस बात की है कि जिस अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन की तलाश में अफगानिस्तान की तेरा बोरा पहाड़ियों की खाक छानी और अंततः पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारा था, जिस अमेरिका ने अफगानिस्तान में छिपे बैठे अल जवाहरी को ड्रोन मिसाइल से मार गिया और जिस अमेरिका ने इराक में घुसकर सद्दाम हुसैन को ढूंढकर फांसी पर चढ़ाया था उसे आतंकी निज्जर की हत्या और पन्नू पर हमले की साजिश की इतनी चिंता क्यों है? जबकि अमेरिका एक तरफ भारत से व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ वह खालिस्तानी आतंकवाद के मामले में दोगली चाल चल रहा है। अगर भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ा तो अमेरिका की कूटनीतिक प्राथमिकताओं के चलते वह कनाड़ा का साथ देगा। इसका कारण कनाडा अमेरिका का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार एवं उनके पारम्परिक रिश्ते हैं।

ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, अमेरिका ने ही इस मामले में उन्हें खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी। अमेरिका ने अपने देश की भूमि पर पन्नू की हत्या की साजिश को न केवल नाकाम किया बल्कि इस साजिश में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया है। इसके बाद अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

अमेरिका एवं कनाड़ा की खालिस्तान समर्थकों को लेकर भूमिका संदेह एवं शंकाग्रस्त ही रही है। पिछले कुछ समय से कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रिेलिया में कुछ खालिस्तान समर्थकों ने जिस तरह की हरकतें करनी शुरू कर दी हैं, उससे यही लगता है कि भारत में मनमानी करने में मिली हताशा को अब वे दूसरे देशों में अभिव्यक्त कर रहे हैं। लेकिन सरकार देश के साथ विदेश की धरती पर बढ़ रही खालिस्तान समर्थकों की घटनाओं को लेकर सतर्क एवं सावधान है। विशेषतः आतंकवादी पन्नू पर उसकी नजर है, क्योंकि वह अमेरिका में रहकर पंजाब में खालिस्तानी अलगाववादी मुहिम चला रहा है।

भारत ने उसे आतंकवादी घोषित कर रखा है और उस पर एक दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं। वह कथित खालिस्तान की स्थापना को लेकर डींगे हांकता एवं षड़यंत्र रचता रहता है। एक आतंकी इतना प्रभावशाली हो चुका है जो कनाडा में रह रहे भारतीय समुदाय को धर्म के आधार पर विभाजित करने के साथ भारत की एकता और अखण्डता को खंडित करने की कोशिश कर रहा है।

सिख समुदाय के लोग भी शांति चाहते हैं और अपने धर्म की आदर्श परम्पराओं को घूमिल होने से बचाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि उन्होंने लांग आइलैंड गुरुद्वारे में उत्पाद मचाने की कोशिश करने वाले खालिस्तान समर्थकों को गुरुद्वारे से बाहर निकाल दिया। सिख समुदाय के लोगों ने यह साबित किया कि अवांछित हरकत करने वाले लोगों को सिख-प्रतिनिधि चेहरे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। गिनती के कुछ लोग अगर खालिस्तान समर्थन के नाम पर मनमानी करने की उन्मादी कोशिश कर रहे हैं तो वे कामयाब नहीं होंगे।

गुरुद्वारे के भीतर ही सिख समुदाय के लोगों ने राजदूत का जोरदार स्वागत करके खालिस्तान समर्थकों के मजसूबों पर पानी फैर दिया। वहां मौजूद राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार विदेश में बसे भारतीयों और सिख समुदाय के साथ करीबी रिश्ता कभी नहीं टूटने देगा। जाहिर है, अलगाववाद के झांसे में ज्यादातर सिख नहीं आ रहे हैं और उनकी प्राथमिकताओं में भारत की एकता, अमनचैन एवं सिखधर्म की मजबूत मर्यादाएं एवं शालीन परम्पराएं ही है। बावजूद इसके बड़ा सच यह भी है कि अमेरिका और खासतौर पर कनाडा में पिछले कुछ समय से खालिस्तान समर्थक गुटों ने अपने पांव पैलाए हैं और भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उसक प्रति लापरवाही भी नहीं बरती जानी चाहिए।

सिख समुदाय के लोगों को भी एकजुट होकर उनके धर्म के नाम पर होने वाली इन अमानवीय, आतंकी एवं हिंसक घटनाओं का विरोध करना चाहिए। क्योंकि सिख धर्म को कालजयी बनाने के लिए गुरु गोविन्द सिंह ने सभी धर्मों और जातियों के लोगों को गुरु-शिष्य-परम्परा में दीक्षित किया एवं राष्ट्रीय एकता के लिये बलिदान की भावनाओं को जगाया। उन्होंने आने वाली शताब्दियों के लिए एक नए मनुष्य का सृजन किया। यह नया मनुष्य जातियों एवं धर्मों में विभक्त न होकर धार्मिकता, मानवीयता, राष्ट्रीय एकता एवं देश के संरक्षण के लिए सदैव कटिबद्ध रहने वाला है। सबको साथ लेकर चलने की यह संरचना, निस्संदेह, सिख मानस की थाती है। फिर, सिख धर्म का परम लक्ष्य मानव-कल्याण ही तो है।

इन आदर्श परम्पराओं को धुंधलाने वाले खालिस्तान समर्थक, आतंकी पन्नू और उसकी अलगाववादी सोच को निस्तेज करना ही वक्त ही बड़ी जरूरत है। इसी से कई दशकों से पंजाब में समय-समय पर खडे़ किये जा रहे अलगाव, हिंसात्मक-ज़लज़लों एवं निर्दयी विध्वंसों को रोका जा सकता है, इसी से पंजाब की धरती एवं सिख समुदाय के लोगों का शान्तिपूर्ण अस्तित्व कायम रह पायेगा।ललित गर्ग